
जब-जब पाकिस्तान से आतंकवाद रोकने की बात की जाती है, वह बहाने बनाने लगता है। इस बार भी ऐसा ही है। हमारी सरकार भी लोगों के दबाव के चलते पाक को कह तो देती है, लेकिन उसे भी पता है की पाक आतंकवाद को नही रोक सकता। अगर उसके वश में होता तो अपने देश में हो रहे हमलो को ही रोक लेता। पाकिस्तान को जब अमेरिका की सीधी मदद मिल रही है तो उसे डरने की क्या जरूरत है। उसका जितना नुक्सान होता है उतना तो उसे अमेरिका से मिल ही जाता है। वैसे अमेरिका के नये राष्टरपति ओबामा से अपेक्षा की जा रही थी की वो आतंकवाद पर लगाम लगायेंगे, लेकिन लगता है की वो ऐसा चाहते ही नही। इंडिया की मीडिया ने जो ओबामा के बारे में पर्चारित किया, सब झूट निकला। वो किसी भी तरीके से मसीहा साबित नही हुए। आख़िर वो हैं तो अमेरिकी ही न।
न तो अमेरिका और न ही पकिस्तान अपनी हरकतों से बाज आने वाले. दोनों ही कुत्ते की दुम हैं और सबको पता है की कुत्ते की दुम कभी सीधी नही होती।
सदियों से यह प्रश्न ज्यों का त्यों खड़ा है। समाधान ------ ?
सादर
श्यामल सुमन
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bhaiyon ram ram. आपके अनुरोध पर कार्यवाही नहीं हो सकी. कृपया फिर प्रयास करें
SAHI KAHA AAPNE