रुली बिश्नोई
सरकार अब समलेंगिग संबंधो को कानूनी रूप देने का मन बना रही है। सरकार के इस कदम से सम्लेंगिंगो का भला हो न हो समाज का नैतिक पतन होना अवस्वम्भावी है । पश्चिम के पेरेकारों ने हमारी संस्कृति को अपूर्णीय हानि पहुचाई है , परन्तु लगता है की अभी उनका दिल भरा नहीं है । अब दूसरो को क्या दोस देन जब हमारी सरकार ही देश का सत्यानास करने पर तुली हो। गे समर्थको का कहना है की कई देशों में इसे कानूनी मान्यता प्राप्त है। इसलिए अपने देश में भी इसे कानूनीजामा पहनाया जाए । इनका कहना है की इन्हें समान अधिकार दिए जाएँ. इन मूर्खों से पूछा जाये की इनके अधिकार छीने ही किसने थे. अब अगर ये उलटी गंगा बहायेंगे तो इन्हें अधिकार नहीं सजा मिलनी चाहिए. ये समाज ही नहीं प्रक्रति के भी दुसमन है. इनकी मांग मानना तो दूर सुननी भी नहीं चाहिए.
(http://bakbak-bishnoi.blogspot.com/ से साभार)
sahi hai, bahut sahi hai,, ho skta hai kuchh logo ko ye bura lage.. like ra** and a***a**