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कहानी-किस्सा की कविताएं

1:43 AM, Posted by सुधीर, 4 Comments

हुनर
पहले आदमी बाजार में आया
अपना हुनर बेचने।
फिर औरत भी बाजार पहुंची
खुद को बेचने।
...यह भी आदमी का ही हुनर था।।
खेत
शहर की ओर जाती सड़क से खेत की मिट्टी ने पूछा,
दस साल पहले तू मेरे किसान को ले गई थी,
वह लौटकर नहीं आया।
अगले दिन सड़क किसान को शहर से ले आई।
उसके अगले दिन किसान खेत बेचकर फिर शहर चला गया।।
पेट
किसान के पेट ने कहा-मैं भूखा हूं,
कल से कुछ नहीं खाया।
किसान सोचने लगा-
भगवान गरीब को ऐसा पेट क्यों देता है
जो न गांव में भरता है और न शहर में।।
-सुधीर राघव

(सुधीर राघव की अन्य कविताओं के लिए देखें -
http://sudhirraghav.blogspot.com/

4 Comments

AlbelaKhatri.com @ June 27, 2009 10:24 AM

adbhut !
abhinav !
umdaa kavitayen............badhaai !

ओम आर्य @ June 27, 2009 12:52 PM

BEHATARIN KAWITAAYE ............BHAW SE SARABOR

आमीन @ June 27, 2009 5:56 PM

nice... poems sir... lage raho

संजय भास्कर @ October 22, 2009 6:12 PM

कम शब्दों में बहुत सुन्दर कविता।