रुली बिश्नोई
चोर का बेटा चोर और सिपाही का बेटा सिपाही वाली कहावत लगता है अब बीते दिनों की बात हो गयी है। अब चंडीगढ़ में जो घट रहा है उससे तो यही लग रहा है की अब सिपाहियों के बेटों ने चोरों से उनका धंधा छिनने की पूरी तैयारी कर ली है। हाईवे रोबर्स गैंग में पुलिसवालों की संतानों की भरमार है। कार चोरी में भी एक आर्मी अफसर का बेटा धरा गया। स्नेचिंग के भी कई मामलों में खाखिवालों की संतानों के नाम सामने आए। यह चिंता का विषय है की आख़िर कानून के रखवालों के घर ही अपराध की पाठशाला क्यों बन रहे हैं। आख़िर ऐसा कौन सा कारण है जो सिपाहियों के बेटों को अपराधी बना रहा है, जिमेदार नागरिक नहीं । एक तथ्य उभर कर सामने जो आया है वो ये है की इन बिगडेल युवाओं ने मारपीट कर अपराध की दुनिया में कदम रखा। बाप की वर्दी के खाखी रंग में इनके ये छोटे अपराधों के दाग छिप गये। कोई सजा नहीं मिली तो होसला और बढा। चोरी चकारी में हाथ आजमाए। और इस तरह तरक्की करते हुए लूट-डकेती तक करने लगे। बाप की वर्दी इनके खूब काम आई। पुलिस वालों की संतानों को अपराधी बनाने में काली कमाई भी अपना रंग खूब दिखा रही है। ये किसी से छिपा नहीं है की आज पुलिस डिपार्टमेन्ट भ्रस्ताचार में डूब चुका है। ये काली कमाई ही पुलिस वालों की संतानों को अपराध की दुनिया में धकेल रही है। अब वक़्त आ गया है की पुलिस विभाग के ढांचें में आमूल चूल परिवर्तन किया जाये. साथ ही खाखीधारियों को भी अपनी संतानों पर अधिक ध्यान देना होगा. नहीं तो ये उनका भविष्य बिगाड़ देंगें.
ये पॉवर सेन्टर से उपजी नार्मल प्रक्रिया है!
JARURI NAHI SIPAHI KA BETA SIPAHI HI BANE